Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.21.3: जिस प्रकार कछुआ अपने अंगों को सब ओर से समेट लेता है, उसी प्रकार जब मनुष्य अपनी समस्त इच्छाओं को समेट लेता है, उस समय उसके अन्तःकरण में ज्योति रूपी आत्मा तुरन्त प्रकाशित हो जाती है। | mahabharat अध्याय 12.21: देवस्थान मुनिके द्वारा युधिष्ठिरके प्रति उत्तम धर्मका और यज्ञादि करनेका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिस प्रकार कछुआ अपने अंगों को सब ओर से समेट लेता है, उसी प्रकार जब मनुष्य अपनी समस्त इच्छाओं को समेट लेता है, उस समय उसके अन्तःकरण में ज्योति रूपी आत्मा तुरन्त प्रकाशित हो जाती है।
'Just as a tortoise withdraws its limbs from all sides, similarly when a man withdraws all his desires, at that time the soul in the form of light immediately becomes illuminated in his inner being.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥