Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.21.17: उसका यह लोक और परलोक दोनों ही सफल हैं। मैं मानता हूँ कि संन्यास द्वारा निर्वाण प्राप्त करना अत्यंत कठिन और दुर्लभ है; क्योंकि उसमें अनेक बाधाएँ हैं॥17॥ | mahabharat अध्याय 12.21: देवस्थान मुनिके द्वारा युधिष्ठिरके प्रति उत्तम धर्मका और यज्ञादि करनेका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्यायं च परश्चैव लोक: स्यात् सफलोदय:।
निर्वाणं हि सुदुष्प्राप्यं बहुविघ्नं च मे मतम्॥ १७॥
अनुवाद
उसका यह लोक और परलोक दोनों ही सफल हैं। मैं मानता हूँ कि संन्यास द्वारा निर्वाण प्राप्त करना अत्यंत कठिन और दुर्लभ है; क्योंकि उसमें अनेक बाधाएँ हैं॥17॥
His both this world and the next are successful. I believe that it is extremely difficult and rare to attain nirvana through renunciation; because there are many obstacles in it.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥