Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d9: श्री भगवान बोले- हे देवर्षि! मैं प्रसन्नतापूर्वक यह दिव्य स्मरण आपको सुनाता हूँ। मृत्यु के समय इसका अध्ययन और श्रवण करने से मनुष्य मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीभगवानुवाच
हन्त ते कथयिष्यामि इमां दिव्यामनुस्मृतिम्।
यामधीत्य प्रयाणे तु मद्भावायोपपद्यते॥
अनुवाद
श्री भगवान बोले- हे देवर्षि! मैं प्रसन्नतापूर्वक यह दिव्य स्मरण आपको सुनाता हूँ। मृत्यु के समय इसका अध्ययन और श्रवण करने से मनुष्य मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है।
Sri Bhagavan said- O Devrishi! I happily narrate this divine reminder to you. By studying and listening to this at the time of death, a man attains my form.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥