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mahabharat 12.209.d86: अनुस्मृति के इस परम गुह्य ज्ञान का अध्ययन करने से मनुष्य को ईश्वर के प्रति दृढ़ भक्ति करने की बुद्धि प्राप्त होती है, वह समस्त दुःखों से मुक्त होकर इस पृथ्वी पर सर्वत्र क्लेशों से मुक्त एवं विरक्त होकर विचरण करता है।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d86
 
 
श्लोक  12.209.d86 
इमां रहस्यां परमामनुस्मृति-
मधीत्य बुद्धिं लभते च नैष्ठिकीम्।
विहाय दु:खान्यवमुच्य सङ्कटात्
स वीतरागो विचरेन्महीमिमाम्॥ )
 
 
अनुवाद
अनुस्मृति के इस परम गुह्य ज्ञान का अध्ययन करने से मनुष्य को ईश्वर के प्रति दृढ़ भक्ति करने की बुद्धि प्राप्त होती है, वह समस्त दुःखों से मुक्त होकर इस पृथ्वी पर सर्वत्र क्लेशों से मुक्त एवं विरक्त होकर विचरण करता है।
 
By studying this most secret knowledge of Anusmriti, a person acquires the wisdom to have firm devotion towards God. He gets rid of all the sorrows and roams everywhere on this earth, free from troubles and detached.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि अन्तर्भूमिविक्रीडनं नाम नवाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २०९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें भूमिके भीतर भगवान् वाराहकी क्रीड़ानामक दो सौ नवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ८६ १/२ श्लोक मिलाकर कुल १२२ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)