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mahabharat 12.209.d8: देवर्षि नारद के ये वचन सुनकर वाणी के स्वामी और वर देने वाले भगवान विष्णु ने नारदजी से इस प्रकार कहा।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  12.209.d8 
श्रुत्वा तस्य तु देवर्षेर्वाक्यं वाचस्पति: स्वयम्।
प्रोवाच भगवान् विष्णुर्नारदं वरद: प्रभु:॥
 
 
अनुवाद
देवर्षि नारद के ये वचन सुनकर वाणी के स्वामी और वर देने वाले भगवान विष्णु ने नारदजी से इस प्रकार कहा।
 
Hearing these words of Devarshi Narad, Lord Vishnu, the lord of speech and the giver of blessings, said to Naradji thus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)