Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d79: हे नारद श्रेष्ठ! अतः ऋषियों को जन्म और बंधन के भय को दूर करने वाला ज्ञान ही देना चाहिए। इस प्रकार ज्ञान देने से मनुष्य कल्याण और बल प्राप्त करता है। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मात् प्रदेयं साधुभ्यो जन्मबन्धभयापहम्।
एवं दत्त्वा नरश्रेष्ठ श्रेयो वीर्यं च विन्दति॥
अनुवाद
हे नारद श्रेष्ठ! अतः ऋषियों को जन्म और बंधन के भय को दूर करने वाला ज्ञान ही देना चाहिए। इस प्रकार ज्ञान देने से मनुष्य कल्याण और बल प्राप्त करता है।
The best Narada! Therefore, only the knowledge that removes the fear of birth and bondage should be given to sages. By giving knowledge in this way, man attains welfare and strength.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥