Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d78: जो व्यक्ति धर्मोपदेश के माध्यम से किसी अज्ञानी को ज्ञान प्रदान करता है अथवा जो व्यक्ति किसी को सम्पूर्ण पृथ्वी दान करता है, उस ज्ञानदान का फल इस पृथ्वीदान के बराबर माना जाता है। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अज्ञानाय च यो ज्ञानं दद्याद् धर्मोपदेशत:।
कृत्स्नां वा पृथिवीं दद्यात् तेन तुल्यं च तत्फलम्॥
अनुवाद
जो व्यक्ति धर्मोपदेश के माध्यम से किसी अज्ञानी को ज्ञान प्रदान करता है अथवा जो व्यक्ति किसी को सम्पूर्ण पृथ्वी दान करता है, उस ज्ञानदान का फल इस पृथ्वीदान के बराबर माना जाता है।
One who imparts knowledge to an ignorant person through religious preaching or one who donates the entire earth to someone, the result of that donation of knowledge is considered to be equal to the donation of this earth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥