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mahabharat 12.209.d74: नारद! यदि मेरा कोई भक्त भक्तिपूर्वक मुझे नमस्कार करता है, तो चाहे वह चाण्डाल ही क्यों न हो, वह अक्षयलोक को प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d74
 
 
श्लोक  12.209.d74 
नम इत्येव यो ब्रूयान्मद्भक्त: श्रद्धयान्वित:॥
तस्याक्षयो भवेल्लोक: श्वपाकस्यापि नारद।
 
 
अनुवाद
नारद! यदि मेरा कोई भक्त भक्तिपूर्वक मुझे नमस्कार करता है, तो चाहे वह चाण्डाल ही क्यों न हो, वह अक्षयलोक को प्राप्त करता है।
 
Narada! If any devotee of mine simply says Namaskar to me with devotion, even if he is a Chandala, he attains Akshaylok.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)