Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.209.d73: यज्ञ, दान और तप - ये बुद्धिमान पुरुषों को पवित्र करते हैं; इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह बिना किसी स्वार्थ के यज्ञ, दान और तप करे।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d73
 
 
श्लोक  12.209.d73 
यज्ञो दानं तपश्चैव पावनानि मनीषिणाम्॥
यज्ञं दानं तपस्तस्मात् कुर्यादाशीर्विवर्जित:।
 
 
अनुवाद
यज्ञ, दान और तप - ये बुद्धिमान पुरुषों को पवित्र करते हैं; इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह बिना किसी स्वार्थ के यज्ञ, दान और तप करे।
 
Sacrifices, charity and austerities - these purify wise men; therefore, one should perform sacrifices, charity and austerities without any selfish motive.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)