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mahabharat 12.209.d7: मनुष्य को प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर किस मंत्र का जप करना चाहिए तथा योगी को किस प्रकार निरन्तर ध्यान करना चाहिए? कृपया इस शाश्वत सिद्धांत का वर्णन कीजिए।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  12.209.d7 
किं च जप्यं जपेन्नित्यं कल्यमुत्थाय मानव:।
कथं युञ्जन् सदा ध्यायेद् ब्रूहि तत्त्वं सनातनम्॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर किस मंत्र का जप करना चाहिए तथा योगी को किस प्रकार निरन्तर ध्यान करना चाहिए? कृपया इस शाश्वत सिद्धांत का वर्णन कीजिए।
 
Which mantra should a man chant every morning after waking up and how should a Yogi meditate continuously? Please describe this eternal principle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)