Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d64: साधक को चाहिए कि वह पाँचों कर्मेन्द्रियों और पाँचों ज्ञानेन्द्रियों को वश में रखकर उन दसों इन्द्रियों को मन में लीन कर दे। मन को अहंकार में, अहंकार को बुद्धि में और बुद्धि को आत्मा में लगा दे। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्मेन्द्रियाणि संयम्य पञ्च बुद्धीन्द्रियाणि च।
दशेन्द्रियाणि मनसि अहङ्कारे तथा मन:॥
अहङ्कारं तथा बुद्धौ बुद्धिमात्मनि योजयेत्।
अनुवाद
साधक को चाहिए कि वह पाँचों कर्मेन्द्रियों और पाँचों ज्ञानेन्द्रियों को वश में रखकर उन दसों इन्द्रियों को मन में लीन कर दे। मन को अहंकार में, अहंकार को बुद्धि में और बुद्धि को आत्मा में लगा दे।
The seeker should keep the five senses of action and five senses under control and merge those ten senses in the mind. Put your mind in ego, ego in intellect and intellect in soul.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥