Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d62: मेरे पूर्वजन्मों में जितने भी रोग संचित हुए हैं, वे सब मेरे शरीर में प्रकट हो जाएँ। मैं अपने समस्त ऋणों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के परम धाम जाना चाहता हूँ। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरे पूर्वजन्मों में जितने भी रोग संचित हुए हैं, वे सब मेरे शरीर में प्रकट हो जाएँ। मैं अपने समस्त ऋणों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के परम धाम जाना चाहता हूँ।
May all the diseases that I have accumulated in my previous lives, appear in my body. I want to be free from all my debts and go to the supreme abode of Lord Vishnu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥