Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d60: मेरे पूर्वजन्म में किये गए पापकर्मों के फलस्वरूप मेरे शरीर में रोग आएँ और नाना प्रकार के कष्ट मुझे कष्ट पहुँचाएँ। इन सबका जो ऋण मुझ पर है, वह मुझे चुकाएँ। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पूर्वदेहकृता ये मे व्याधय: प्रविशन्तु माम्।
अर्दयन्तु च दु:खानि ऋणं मे प्रतिमुञ्चतु॥
अनुवाद
मेरे पूर्वजन्म में किये गए पापकर्मों के फलस्वरूप मेरे शरीर में रोग आएँ और नाना प्रकार के कष्ट मुझे कष्ट पहुँचाएँ। इन सबका जो ऋण मुझ पर है, वह मुझे चुकाएँ।
As a result of the bad deeds that I have committed in my previous life, may diseases enter my body and various kinds of sufferings come and torment me. May the debt that I have for all these be repaid.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥