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mahabharat 12.209.d51: जगन्नाथ! आप भगवान हैं, इसीलिए आपको परमात्मा कहा जाता है। देव! सुरेश्वर! जो भक्तों के लिए अच्छा हो, वही मेरे लिए भी सोचिए।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d51
 
 
श्लोक  12.209.d51 
ईश्वरोऽसि जगन्नाथ तत: परम उच्यसे॥
भक्तानां यद्धितं देव तद् ध्याहि त्रिदशेश्वर।
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ! आप भगवान हैं, इसीलिए आपको परमात्मा कहा जाता है। देव! सुरेश्वर! जो भक्तों के लिए अच्छा हो, वही मेरे लिए भी सोचिए।
 
Jagannath! You are God, that is why you are called Paramatma. Dev! Sureshwar! Whatever is good for the devotees, think about it for me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)