Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d43: जो आपके अनन्य भक्त हैं, जो द्वन्द्वों से रहित हैं और निष्काम कर्म करने वाले हैं, जिन्होंने ज्ञानरूपी अग्नि में अपने समस्त कर्मों को जला दिया है, वे पुरुष आपमें दृढ़ विश्वास रखते हुए आपमें ही प्रवेश करते हैं। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकान्तिनो हि निर्द्वन्द्वा निराशी: कर्मकारिण:।
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणस्त्वां विशन्ति विनिश्चिता:॥
अनुवाद
जो आपके अनन्य भक्त हैं, जो द्वन्द्वों से रहित हैं और निष्काम कर्म करने वाले हैं, जिन्होंने ज्ञानरूपी अग्नि में अपने समस्त कर्मों को जला दिया है, वे पुरुष आपमें दृढ़ विश्वास रखते हुए आपमें ही प्रवेश करते हैं।
Those who are your exclusive devotees, who are free from dualities and who perform selfless actions, who have burnt all their karmas in the fire of knowledge, those men having firm faith in you, enter into you only.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥