Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d42: जो काम और क्रोध से रहित, राग-द्वेष से रहित और आपके अनन्य भक्त हैं, वे ही आपको जान सकते हैं। वे ब्राह्मण जो सांसारिक सुखों के नरक में फंसे हुए हैं, आपको नहीं जानते। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कामक्रोधविनिर्मुक्ता रागद्वेषविवर्जिता:।
नान्यभक्ता विजानन्ति न पुनर्नारका द्विजा:॥
अनुवाद
जो काम और क्रोध से रहित, राग-द्वेष से रहित और आपके अनन्य भक्त हैं, वे ही आपको जान सकते हैं। वे ब्राह्मण जो सांसारिक सुखों के नरक में फंसे हुए हैं, आपको नहीं जानते।
Only those who are free from lust and anger, devoid of attachment and hatred and are your exclusive devotees, can know you. Those Brahmins who are trapped in the hell of worldly pleasures do not know you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥