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mahabharat 12.209.d41: हे इन्द्रियों से परे परमेश्वर! आपको नमस्कार है। आपको दृश्य रूपों से जानना असंभव है। इस संसार में जो लोग आपको नहीं जानते, वे जन्म-मृत्यु के चक्र में फँसे रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d41
 
 
श्लोक  12.209.d41 
अतीन्द्रिय नमस्तुभ्यं लिङ्गैर्व्यक्तैर्न मीयसे।
ये च त्वां नाभिजानन्ति संसारे संसरन्ति ते॥
 
 
अनुवाद
हे इन्द्रियों से परे परमेश्वर! आपको नमस्कार है। आपको दृश्य रूपों से जानना असंभव है। इस संसार में जो लोग आपको नहीं जानते, वे जन्म-मृत्यु के चक्र में फँसे रहते हैं।
 
O Supreme God beyond the senses! Salutations to you. It is impossible to know you through the visible forms. Those who do not know you in this world remain trapped in the cycle of birth and death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)