Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d4: पूर्वकाल में नारद जी ने भगवान नारायण से यह प्रश्न पूछा था, जिनके वक्षस्थल पर श्रीवत्स चिन्ह सुशोभित है, जो इस जगत के बीज (मूल कारण) हैं, जिनका अन्त नहीं है और जो इस जगत के साक्षी हैं। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीवत्साङ्कं जगद्बीजमनन्तं लोकसाक्षिणम्।
पुरा नारायणं देवं नारद: परिपृष्टवान्॥
अनुवाद
पूर्वकाल में नारद जी ने भगवान नारायण से यह प्रश्न पूछा था, जिनके वक्षस्थल पर श्रीवत्स चिन्ह सुशोभित है, जो इस जगत के बीज (मूल कारण) हैं, जिनका अन्त नहीं है और जो इस जगत के साक्षी हैं।
Narada had in the past asked this question to Lord Narayana whose chest is adorned with the mark of Shrivatsa, who is the seed (root cause) of this universe, who has no end and who is the witness of this universe, in the following manner.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥