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mahabharat 12.209.d39: जो भगवान श्री हरि सूर्यमण्डल में सोम रूप में निवास करते हैं और जिनका स्वरूप उस सोम के भीतर की अलौकिक प्रभा है, वे मुझ पर प्रसन्न हों।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d39
 
 
श्लोक  12.209.d39 
सूर्यमध्ये स्थित: सोमस्तस्य मध्ये च या स्थिता।
भूतबाह्या च या दीप्ति: स महात्मा प्रसीदतु॥
 
 
अनुवाद
जो भगवान श्री हरि सूर्यमण्डल में सोम रूप में निवास करते हैं और जिनका स्वरूप उस सोम के भीतर की अलौकिक प्रभा है, वे मुझ पर प्रसन्न हों।
 
May the Supreme Lord Shri Hari, who resides in the form of Soma in the solar system and whose form is the supernatural radiance within that Soma, be pleased with me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)