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mahabharat 12.209.d36: ज्ञानयोगी, कर्मयोगी तथा अन्य सभी सिद्ध और महर्षि जिन्हें जानकर इस संसार से मुक्त हो जाते हैं, उन भगवान श्री हरि मुझ पर प्रसन्न हों।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d36
 
 
श्लोक  12.209.d36 
सांख्ययोगाश्च ये चान्ये सिद्धाश्च परमर्षय:।
यं विदित्वा विमुच्यन्ते स महात्मा प्रसीदतु॥
 
 
अनुवाद
ज्ञानयोगी, कर्मयोगी तथा अन्य सभी सिद्ध और महर्षि जिन्हें जानकर इस संसार से मुक्त हो जाते हैं, उन भगवान श्री हरि मुझ पर प्रसन्न हों।
 
Gyan Yogi, Karmayogi and all the other Siddhas and Maharishis, by knowing whom they become free from this world, may God Shri Hari be pleased with me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)