Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d30: प्रकृति और महत्तत्त्व- ये दोनों जड़ हैं। पुरुष चेतन और अजन्मा है। मैं उन भगवान की शरण लेता हूँ जो क्षर और अक्षर पुरुषों से श्रेष्ठ और अद्वितीय हैं। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न प्रधानो न च महान् पुरुषश्चेतनो ह्यज:।
अनयोर्य: परतर: तमस्मि शरणं गत:॥
अनुवाद
प्रकृति और महत्तत्त्व- ये दोनों जड़ हैं। पुरुष चेतन और अजन्मा है। मैं उन भगवान की शरण लेता हूँ जो क्षर और अक्षर पुरुषों से श्रेष्ठ और अद्वितीय हैं।
Prakriti and Mahatattva-these two are inert. Purusha is conscious and unborn. I take refuge in the Supreme Personality of Godhead who is superior and unique to these two Kshar and Akshar Purushas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥