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mahabharat 12.209.d29: मैं भगवान विष्णु की शरण में आया हूँ, जो अव्यक्त परब्रह्म हैं और जिनसे यह व्यक्त जगत उत्पन्न हुआ है, जो व्यक्त से परे हैं, अविनाशी हैं और जिनसे बढ़कर कुछ भी नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d29
 
 
श्लोक  12.209.d29 
अव्यक्ताद् व्यक्तमुत्पन्नं व्यक्ताद् यस्तु परोऽक्षर:।
यस्मात् परतरं नास्ति तमस्मि शरणं गत:॥
 
 
अनुवाद
मैं भगवान विष्णु की शरण में आया हूँ, जो अव्यक्त परब्रह्म हैं और जिनसे यह व्यक्त जगत उत्पन्न हुआ है, जो व्यक्त से परे हैं, अविनाशी हैं और जिनसे बढ़कर कुछ भी नहीं है।
 
I have taken refuge in Lord Vishnu, the unmanifested Supreme Being from whom this manifested world has originated, who is beyond the manifested and who is indestructible and who has nothing better than Him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)