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mahabharat 12.209.d25: भगवान विष्णु, जो अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, नक्षत्र, ब्रह्मा, रुद्र, इन्द्र तथा योगियों के तेज को भी जीत लेते हैं, मुझ पर प्रसन्न हों।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d25
 
 
श्लोक  12.209.d25 
अग्नीषोमार्कताराणां ब्रह्मरुद्रेन्द्रयोगिनाम्।
यस्तेजयति तेजांसि स मे विष्णु: प्रसीदतु॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु, जो अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, नक्षत्र, ब्रह्मा, रुद्र, इन्द्र तथा योगियों के तेज को भी जीत लेते हैं, मुझ पर प्रसन्न हों।
 
May Lord Vishnu, who conquers the brilliance of the fire, the moon, the sun, the stars, Brahma, Rudra, Indra and even the yogis, be pleased with me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)