Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.d24: जो मेघ, पृथ्वी, फसल, काल, धर्म, कर्म और अकर्म ये सब गुणों के भण्डार हैं, वे श्यामवर्ण भगवान वासुदेव मुझ पर प्रसन्न हों। | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पर्जन्य: पृथिवी सस्यं कालो धर्म: क्रियाक्रिये।
गुणाकर: स मे बभ्रुर्वासुदेव: प्रसीदतु॥
अनुवाद
जो मेघ, पृथ्वी, फसल, काल, धर्म, कर्म और अकर्म ये सब गुणों के भण्डार हैं, वे श्यामवर्ण भगवान वासुदेव मुझ पर प्रसन्न हों।
May the dark complexioned Lord Vasudev be pleased with me, whose form is the clouds, the earth, the crops, time, religion, action and absence of action - the storehouse of qualities.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥