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mahabharat 12.209.d2: हे कुरुश्रेष्ठ! जब मृत्यु का समय आए, तब किसका चिन्तन करना चाहिए, क्या परम सिद्धि प्राप्त हो सकती है? मैं यह सत्य सुनना चाहता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  12.209.d2 
किमनुस्मरन् कुरुश्रेष्ठ मरणे पर्युपस्थिते।
प्राप्नुयात् परमां सिद्धिं श्रोतुमिच्छामि तत्त्वत:॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुश्रेष्ठ! जब मृत्यु का समय आए, तब किसका चिन्तन करना चाहिए, क्या परम सिद्धि प्राप्त हो सकती है? मैं यह सत्य सुनना चाहता हूँ।
 
Best of the Kurus! When the time of death comes, who should one think about, can one achieve the ultimate success? I want to hear this in truth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)