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mahabharat 12.209.d14: मैं भगवान विष्णु के उस अद्भुत, परम रूप की शरण लेता हूँ, जो समस्त लोकों के स्वामी और रक्षक हैं, जिनके हजारों नेत्र हैं, तथा जो भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक d14
 
 
श्लोक  12.209.d14 
लोकनाथं सहस्राक्षमद्भुतं परमं पदम्॥
भगवन्तं प्रपन्नोऽस्मि भूतभव्यभवत्प्रभुम्।
 
 
अनुवाद
मैं भगवान विष्णु के उस अद्भुत, परम रूप की शरण लेता हूँ, जो समस्त लोकों के स्वामी और रक्षक हैं, जिनके हजारों नेत्र हैं, तथा जो भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी हैं।
 
I take refuge in that wonderful, supreme form of Lord Vishnu, who is the owner and protector of all the worlds, who has thousands of eyes, and who is the master of the past, the present and the future.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)