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mahabharat 12.209.7: प्राचीन काल में नरकासुर आदि सैकड़ों बड़े-बड़े राक्षस क्रोध और लोभ के वशीभूत होकर शक्ति के मद में चूर हो गए थे।   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.209.7 
पुरा दानवमुख्या हि क्रोधलोभसमन्विता:।
बलेन मत्ता: शतशो नरकाद्या महासुरा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में नरकासुर आदि सैकड़ों बड़े-बड़े राक्षस क्रोध और लोभ के वशीभूत होकर शक्ति के मद में चूर हो गए थे।
 
In ancient times, hundreds of major demons such as Narakasura etc. became intoxicated with power under the influence of anger and greed. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)