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mahabharat 12.209.4: भीष्म बोले, "हे राजन! बहुत समय पहले की बात है, मैं आखेट के लिए वन में गया और मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में रुका। मैंने वहां हजारों ऋषियों को बैठे देखा।"   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.209.4 
भीष्म उवाच
पुराहं मृगयां यातो मार्कण्डेयाश्रमे स्थित:।
तत्रापश्यं मुनिगणान् समासीनान् सहस्रश:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजन! बहुत समय पहले की बात है, मैं आखेट के लिए वन में गया और मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में रुका। मैंने वहां हजारों ऋषियों को बैठे देखा।"
 
Bhishma said, "O King! It happened long ago, I went to the forest for hunting and stayed at the hermitage of sage Markandeya. I saw thousands of sages sitting there."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)