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mahabharat 12.209.35: यही प्रारब्ध है, यही प्रभाव है और यही प्रलय काल है। इसी परमेश्वर ने सम्पूर्ण जगत् की रक्षा करते हुए इतनी भयंकर गर्जना की है ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.209.35 
विधिरेष प्रभावश्च काल: संक्षयकारक:।
लोकान् धारयता तेन नादो मुक्तो महात्मना॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
यही प्रारब्ध है, यही प्रभाव है और यही प्रलय काल है। इसी परमेश्वर ने सम्पूर्ण जगत् की रक्षा करते हुए इतनी भयंकर गर्जना की है ॥35॥
 
This is the destiny, this is the effect and this is the destructive time. It is this Supreme Being who has roared so terribly while protecting the entire world. ॥35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)