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mahabharat 12.209.34: हे श्रेष्ठतम! ये महायोगी आत्मा महात्मा पद्मनाभ हैं; अतः तुम अपने मन से क्रोध, भय और शोक को दूर कर दो॥34॥   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.209.34 
पद्मनाभो महायोगी महात्मा भूतभावन:।
न संतापो न भी: कार्या शोको वा सुरसत्तमा:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठतम! ये महायोगी आत्मा महात्मा पद्मनाभ हैं; अतः तुम अपने मन से क्रोध, भय और शोक को दूर कर दो॥34॥
 
The best of the best! This Mahayogi is the spirit soul Mahatma Padmanabha; Therefore, you should remove anger, fear and grief from your mind. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)