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mahabharat 12.209.31: ब्रह्माजी बोले - देवताओं! ये महाबली महायोगी भूतभावन भगवान विष्णु हैं, जो दैत्य राजाओं का संहार करके आ रहे हैं॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.209.31 
पितामह उवाच
निहत्य दानवपतीन् महावर्ष्मा महाबल:।
एष देवो महायोगी भूतात्मा भूतभावन:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - देवताओं! ये महाबली महायोगी भूतभावन भगवान विष्णु हैं, जो दैत्य राजाओं का संहार करके आ रहे हैं॥31॥
 
Brahmaji said – Gods! This great Mahabali Mahayogi is the ghostly spirit Lord Vishnu, who is coming after killing the demon kings. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)