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mahabharat 12.209.3: हे पितामह! सम्पूर्ण जगत के स्वामी होते हुए भी उन्होंने तिर्यग्योनीम में किस कारण से जन्म लिया? यह मुझे बताइए॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.209.3 
तिर्यग्योनिगतं रूपं कथं धारितवान् प्रभु:।
केन कार्यनिसर्गेण तमाख्याहि महाबल॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे पितामह! सम्पूर्ण जगत के स्वामी होते हुए भी उन्होंने तिर्यग्योनीम में किस कारण से जन्म लिया? यह मुझे बताइए॥3॥
 
Great Grandfather! Despite being the Lord of the entire world, for what reason did he take birth in Tiryagyonim? Tell me this. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)