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mahabharat 12.209.28-30h: उसकी गर्जना सुनकर सभी देवता जगत के स्वामी ब्रह्माजी के पास गए। वहाँ पहुँचकर वे इस प्रकार बोले - 'देव! हे प्रभु! यह कैसी गर्जना है? हम इसे नहीं जानते। वह वीर पुरुष कौन है? अथवा यह किसकी गर्जना है? जिसने इस जगत को व्याकुल कर दिया है। उसके तेज से सभी देवता और दानव मोहित हो गए हैं।'॥ 28-29 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 28-30h
 
 
श्लोक  12.209.28-30h 
ततो देवगणा: सर्वे पितामहमुपाद्रवन्।
तत्र गत्वा महात्मानमूचुश्चैव जगत‍्पतिम्॥ २८॥
नादोऽयं कीदृशो देव नैतं विद्म वयं प्रभो।
कोऽसौ हि कस्य वा नादो येन विह्वलितं जगत‍्॥ २९॥
देवाश्च दानवाश्चैव मोहितास्तस्य तेजसा।
 
 
अनुवाद
उसकी गर्जना सुनकर सभी देवता जगत के स्वामी ब्रह्माजी के पास गए। वहाँ पहुँचकर वे इस प्रकार बोले - 'देव! हे प्रभु! यह कैसी गर्जना है? हम इसे नहीं जानते। वह वीर पुरुष कौन है? अथवा यह किसकी गर्जना है? जिसने इस जगत को व्याकुल कर दिया है। उसके तेज से सभी देवता और दानव मोहित हो गए हैं।'॥ 28-29 1/2॥
 
Hearing his roar, all the gods went to Lord Brahma, the lord of the universe. On reaching there, they spoke thus - 'God! Lord! What kind of roar is this? We do not know it. Who is that brave man? Or whose roar is this? Who has disturbed this world. All the gods and demons are fascinated by his brilliance.'॥ 28-29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)