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mahabharat 12.209.27: समस्त प्राणियों के गुरु और स्वामी, महायोगी भगवान पद्मनाभ अपनी महान सिंह गर्जना के कारण 'सनातन' माने जाते हैं ॥27॥   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.209.27 
नादेन तेन महता सनातन इति स्मृत:।
पद्मनाभो महायोगी भूताचार्य: स भूतराट्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्राणियों के गुरु और स्वामी, महायोगी भगवान पद्मनाभ अपनी महान सिंह गर्जना के कारण 'सनातन' माने जाते हैं ॥27॥
 
Lord Padmanabha, the teacher and master of all living beings, the great yogi, is considered 'Sanatan*' because of his great lion roar. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)