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mahabharat 12.209.19: प्रभु ! यद्यपि वह महाबली दैत्यराज महान बल और वीर्य से युक्त था, फिर भी वह उन प्रभु का कुछ भी अनिष्ट नहीं कर सका ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.209.19 
दानवेन्द्रा महाकाया महावीर्यबलोच्छ्रिता:।
नाशक्नुवंश्च किंचित् ते तस्य कर्तुं तदा विभो॥ १९॥
 
 
अनुवाद
प्रभु ! यद्यपि वह महाबली दैत्यराज महान बल और वीर्य से युक्त था, फिर भी वह उन प्रभु का कुछ भी अनिष्ट नहीं कर सका ॥19॥
 
Lord! Even though that giant demon king was full of great strength and semen, he could not do any harm to that Lord. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)