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mahabharat 12.209.13-14h: वे दैत्य वर पाकर शक्ति और अभिमान से मदमस्त हो गए हैं। वे मूर्ख दैत्य भगवान विष्णु के उस अव्यक्त रूप को नहीं जानते, जो देवताओं के लिए भी कष्टकारक है। उन्होंने वराह रूप धारण कर लिया है। 13 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 13-14h
 
 
श्लोक  12.209.13-14h 
ते वरेणाभिसम्पन्ना बलेन च मदेन च।
नावबुध्यन्ति सम्मूढा विष्णुमव्यक्तदर्शनम्॥ १३॥
वराहरूपिणं देवमधृष्यममरैरपि।
 
 
अनुवाद
वे दैत्य वर पाकर शक्ति और अभिमान से मदमस्त हो गए हैं। वे मूर्ख दैत्य भगवान विष्णु के उस अव्यक्त रूप को नहीं जानते, जो देवताओं के लिए भी कष्टकारक है। उन्होंने वराह रूप धारण कर लिया है। 13 1/2॥
 
'Those demons have become intoxicated with power and pride after getting a groom. Those foolish demons do not know the unmanifested form of Lord Vishnu, who is a trouble even for the gods. He has taken the form of Varaha. 13 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)