Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.209.11: वह भार से दबी हुई, हर्ष और प्रसन्नता से रहित और दुःखी होकर रसातल में डूब रही है। यह देखकर अदिति के सभी पुत्र भय से काँप उठे और ब्रह्माजी से इस प्रकार बोले-॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भारार्तामप्रहृष्टां च दु:खितां संनिमज्जतीम्।
अथादितेया: संत्रस्ता ब्रह्माणमिदमब्रुवन्॥ ११॥
अनुवाद
वह भार से दबी हुई, हर्ष और प्रसन्नता से रहित और दुःखी होकर रसातल में डूब रही है। यह देखकर अदिति के सभी पुत्र भय से काँप उठे और ब्रह्माजी से इस प्रकार बोले-॥11॥
She is drowning in the abyss, overwhelmed with the burden, devoid of joy and happiness and sad. Seeing this, all the sons of Aditi trembled with fear and spoke to Brahmaji thus -॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥