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mahabharat 12.209.10: भयानक रूप वाले महाबली दैत्य समस्त लोक में फैल गए थे। देवताओं ने देखा कि पृथ्वी दैत्यों के पापों के भार से पीड़ित और व्यथित हो रही है।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 209: भगवान् विष्णुका वराहरूपमें प्रकट होकर देवताओंकी रक्षा और दानवोंका विनाश कर देना तथा नारदको अनुस्मृतिस्तोत्रका उपदेश और नारदद्वारा भगवान् की स्तुति  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.209.10 
पृथिवीमार्तरूपां ते समपश्यन् दिवौकस:।
दानवैरभिसंस्तीर्णां घोररूपैर्महाबलै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भयानक रूप वाले महाबली दैत्य समस्त लोक में फैल गए थे। देवताओं ने देखा कि पृथ्वी दैत्यों के पापों के भार से पीड़ित और व्यथित हो रही है।॥10॥
 
Mighty demons with terrifying appearance had spread all over the world. The gods saw that the earth was suffering and distressed due to the burden of the demons' sins.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)