श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.208.36 
एतेषां कीर्तनं कृत्वा सर्वपापात् प्रमुच्यते।
यस्यां यस्यां दिशि ह्येते तां दिशं शरणं गत:।
मुच्यते सर्वपापेभ्य: स्वस्तिमांश्च गृहान् व्रजेत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
इन सब ऋषियों का गुणगान करने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है। इन ऋषियों के निवास वाली दिशाओं में जाकर, उनकी शरण में आया हुआ मनुष्य सब पापों से मुक्त होकर सकुशल अपने घर पहुँच जाता है॥ 36॥
 
By singing the praises of all these sages, a man is freed from all sins. On going to the directions where these sages reside, a man who takes their refuge is freed from all sins and reaches his home safely.॥ 36॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि दिशास्वस्तिकं नाम अष्टाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २०८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें दिशास्वस्तिक नामक दो सौ आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)