श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  12.208.34-35 
एते प्रतिदिशं सर्वे कीर्तितास्तिग्मतेजस:॥ ३४॥
साक्षिभूता महात्मानो भुवनानां प्रभावना:।
एवमेते महात्मान: स्थिता: प्रत्येकशो दिशम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सभी दिशाओं में निवास करने वाले समस्त महापुरुषों का वर्णन किया गया है। ये महात्मा सम्पूर्ण लोकों की रचना करने में समर्थ हैं और सब कुछ के साक्षी हैं। इनका हृदय अत्यन्त विशाल है। इस प्रकार ये सभी दिशाओं में निवास करते हैं॥ 34-35॥
 
In this way, all the illustrious sages residing in every direction have been described. These great souls are capable of creating all the worlds and are witnesses to everything. Their hearts are very large. In this way, they reside in every direction.॥ 34-35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)