श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 30-32h
 
 
श्लोक  12.208.30-32h 
उषङ्गु: कवषो धौम्य: परिव्याधश्च वीर्यवान्॥ ३०॥
एकतश्च द्वितश्चैव त्रितश्चैव महर्षय:।
अत्रे: पुत्रश्च भगवांस्तथा सारस्वत: प्रभु:॥ ३१॥
एते चैव महात्मान: पश्चिमामाश्रिता दिशम्।
 
 
अनुवाद
उशंगु, कवश, धौम्य, शक्तिशाली परिव्याध, एकत, द्वित, त्रित और अत्रि के शक्तिशाली पुत्र भगवान सारस्वत - ये महात्मा महर्षि पश्चिम दिशा में निवास करते हैं। 30-31 1/2॥
 
Ushangu, Kavash, Dhaumya, powerful Parivyadha, Ekat, Dvit, Trit and Atri's powerful sons Lord Saraswat - these Mahatma Maharshi reside in the western direction. 30-31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)