श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 28-30h
 
 
श्लोक  12.208.28-30h 
उन्मुचो विमुचश्चैव स्वस्त्यात्रेयश्च वीर्यवान्॥ २८॥
प्रमुचश्चेध्मवाहश्च भगवांश्च दृढव्रत:।
मित्रावरुणयो: पुत्रस्तथागस्त्य: प्रतापवान्॥ २९॥
एते ब्रह्मर्षयो नित्यमास्थिता दक्षिणां दिशम्।
 
 
अनुवाद
अमुच, विमुच, बलवान स्वस्त्यत्रेय, प्रमुच, इधमवाह, उत्तम व्रतों का दृढ़तापूर्वक पालन करने वाले, मित्रावरुण के प्रतापी पुत्र भगवान अगस्त्य - ये ब्रह्मर्षि सदैव दक्षिण दिशा में रहते हैं । 28-29 1/2॥
 
Unmuch, Vimuch, strong Swastyatreya, Pramuch, Idhamvaha, steadfastly observing the noble vows, Lord Agastya, the glorious son of Mitravaruna - this Brahmarshi always lives in the south direction. 28-29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)