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mahabharat 12.208.24: जो दो अश्विनीकुमार घोर तपस्या में लगे रहते हैं, वे शूद्र कहलाते हैं। अंगिरा गोत्र के सभी देवता ब्राह्मण माने जाते हैं। ऐसा विद्वानों का मत है॥24॥   |   mahabharat अध्याय 12.208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.208.24 
अश्विनौ तु स्मृतौ शूद्रौ तपस्युग्रे समास्थितौ।
स्मृतास्त्वङ्गिरसो देवा ब्राह्मणा इति निश्चय:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो दो अश्विनीकुमार घोर तपस्या में लगे रहते हैं, वे शूद्र कहलाते हैं। अंगिरा गोत्र के सभी देवता ब्राह्मण माने जाते हैं। ऐसा विद्वानों का मत है॥24॥
 
The two Ashwinikumars who are engaged in intense penance are called Shudras. All the gods belonging to Angira gotra are considered Brahmins. This is the opinion of the scholars.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)