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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन
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श्लोक 17
श्लोक
12.208.17
नासत्यश्चैव दस्रश्च स्मृतौ द्वावश्विनावपि।
मार्तण्डस्यात्मजावेतावष्टमस्य महात्मन:॥ १७॥
अनुवाद
नासत्य और दास्र - इन दोनों को अश्विनीकुमार बताया गया है। ये दोनों आठवें आदित्य महात्मा सूर्य के पुत्र हैं।
Nasatya and Dasra – both of them have been described as Ashwinikumars. Both of them are the sons of the eighth Aditya Mahatma Surya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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