vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन
»
श्लोक 14
श्लोक
12.208.14
एते प्रजानां पतय: समुद्दिष्टा यशस्विन:।
अत: परं प्रवक्ष्यामि देवांस्त्रिभुवनेश्वरान्॥ १४॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! ये सभी महाप्रतापी प्रजापति कहे गए हैं। अब मैं तीनों लोकों पर शासन करने वाले देवताओं का परिचय दूँगा॥ 14॥
Yudhishthira! All of them are said to be glorious Prajapatis. Now I will introduce the gods who rule the three worlds.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×