शशबिन्दोश्च भार्याणां सहस्राणि दशाच्युत।
एकैकस्यां सहस्रं तु तनयानामभूत् तदा॥ ११॥
एवं शतसहस्राणां शतं तस्य महात्मन:।
पुत्राणां च न ते कंचिदिच्छन्त्यन्यं प्रजापतिम्॥ १२॥
अनुवाद
हे धर्म से कभी विचलित न होने वाले युधिष्ठिर! शशबिन्दु की दस हजार पत्नियाँ थीं। उनमें से प्रत्येक के गर्भ से एक-एक हजार पुत्र उत्पन्न हुए। इस प्रकार उस महात्मा के एक करोड़ पुत्र हुए। वह अपने अतिरिक्त किसी अन्य प्रजापति की इच्छा नहीं रखता था। ॥11-12॥
Yudhishthira, who never deviates from Dharma! Shashabindu had ten thousand wives. From the womb of each of them, one thousand sons were born. Thus, that great soul had one crore sons. He did not desire any other Prajapati except him. ॥11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)