Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.208.11-12: हे धर्म से कभी विचलित न होने वाले युधिष्ठिर! शशबिन्दु की दस हजार पत्नियाँ थीं। उनमें से प्रत्येक के गर्भ से एक-एक हजार पुत्र उत्पन्न हुए। इस प्रकार उस महात्मा के एक करोड़ पुत्र हुए। वह अपने अतिरिक्त किसी अन्य प्रजापति की इच्छा नहीं रखता था। ॥11-12॥ | mahabharat अध्याय 12.208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शशबिन्दोश्च भार्याणां सहस्राणि दशाच्युत।
एकैकस्यां सहस्रं तु तनयानामभूत् तदा॥ ११॥
एवं शतसहस्राणां शतं तस्य महात्मन:।
पुत्राणां च न ते कंचिदिच्छन्त्यन्यं प्रजापतिम्॥ १२॥
अनुवाद
हे धर्म से कभी विचलित न होने वाले युधिष्ठिर! शशबिन्दु की दस हजार पत्नियाँ थीं। उनमें से प्रत्येक के गर्भ से एक-एक हजार पुत्र उत्पन्न हुए। इस प्रकार उस महात्मा के एक करोड़ पुत्र हुए। वह अपने अतिरिक्त किसी अन्य प्रजापति की इच्छा नहीं रखता था। ॥11-12॥
Yudhishthira, who never deviates from Dharma! Shashabindu had ten thousand wives. From the womb of each of them, one thousand sons were born. Thus, that great soul had one crore sons. He did not desire any other Prajapati except him. ॥11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥