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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  12.207.d7 
ततो वर्षशते पूर्णे भगवाँल्लोकभावन:।
प्रादुश्चकार विश्वात्मा ऋषे: परमसौहृदात्॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सौ वर्ष पूर्ण होने पर संसार के रचयिता भगवान श्री हरि ऋषि के समक्ष प्रकट हुए तथा उन पर अत्यंत कृपा की।
 
Subsequently, on completion of hundred years, Lord Shri Hari, the creator of the world, appeared before Rishi out of utmost kindness towards him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)