Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.207.d3: वे समस्त जीवों के अन्तर्यामी हैं और अपनी योगमाया से आच्छादित होकर प्रतिदिन वैकुण्ठ धाम में निवास करते हैं। तुम्हें उनकी शक्ति और महत्ता का श्रवण करना चाहिए, जिससे तुम्हें श्रीकृष्ण के तत्त्व का ज्ञान हो सके। | mahabharat अध्याय 12.207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रूयतामस्य सद्भाव: सम्यग्ज्ञानं यथा तव।
भूतानामन्तरात्मासौ स नित्यपदसंवृत:॥
अनुवाद
वे समस्त जीवों के अन्तर्यामी हैं और अपनी योगमाया से आच्छादित होकर प्रतिदिन वैकुण्ठ धाम में निवास करते हैं। तुम्हें उनकी शक्ति और महत्ता का श्रवण करना चाहिए, जिससे तुम्हें श्रीकृष्ण के तत्त्व का ज्ञान हो सके।
He is the inner soul of all living beings and resides daily in Vaikuntha Dham covered with His Yogamaya. You should listen to his power and importance, so that you can gain knowledge of Shri Krishna's essence.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥