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इत्युक्त्वा स जगामाथ भगवान् भूतभावन:।
तस्माद् व्रज हृषीकेशं कृष्णं देवकिनन्दनम्॥
अनुवाद
ऐसा कहकर भूतभावन भगवान विष्णु वहाँ से चले गए; अतः युधिष्ठिर! तुम भी समस्त इन्द्रियों के स्वामी भगवान देवकीनन्दन श्रीकृष्ण की शरण में जाओ।
Saying this, the ghostly Lord Vishnu left from there; So Yudhishthir! You too, go to the shelter of Lord Devkinandan Shri Krishna, the master of all the senses.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥