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mahabharat 12.207.d14: श्री भगवान बोले- हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले देवों में श्रेष्ठ मुनि! आपका कल्याण हो। कोई भी वर मांग लीजिए। आपके मन में जो भी इच्छा हो, मुझे स्पष्ट रूप से बताइए। मैं उसे पूर्ण करूंगा।   |   mahabharat अध्याय 12.207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.207.d14 
श्रीभगवानुवाच
भद्रमस्तु ऋषे तुभ्यं वरं वरय सुव्रत।
यत्ते मनसि सुव्यक्तमस्ति च प्रददामि तत्॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले- हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले देवों में श्रेष्ठ मुनि! आपका कल्याण हो। कोई भी वर मांग लीजिए। आपके मन में जो भी इच्छा हो, मुझे स्पष्ट रूप से बताइए। मैं उसे पूर्ण करूंगा।
 
Shri Bhagwan said- O sage of gods who observes the best fast! May you be blessed. Ask for any boon. Whatever desire you have in your mind, tell me clearly. I will fulfill it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)